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थानेदार सहित पुलिसकर्मियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, पायजामे के नाड़े से पुलिस कस्टडी में युवक की संदिग्ध मौत



आजमगढ़ पुलिस हिरासत में मौत का मामला

यूपी में आजमगढ़ जिले के तरवां थाना परिसर में युवक की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ चुका है। प्रशासनिक दबाव और जन आक्रोश के चलते थाना प्रभारी कमलेश पटेल समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों पर यह कार्रवाई डीजीपी के निर्देश के बाद हुई, जिसमें बीएनएस की धारा 103(1), बीएनएस की धारा 352 और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे मामले की जांच अब फूलपुर के पुलिस क्षेत्राधिकारी को सौंपी गई है।


क्या है पूरा मामला?


तरवां थाना क्षेत्र के उमरी भंवरपुर गांव निवासी 21 वर्षीय सनी कुमार को पुलिस ने 29 मार्च को छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने एक युवती को रास्ते में रोककर अभद्र टिप्पणी की और मोबाइल पर आपत्तिजनक गाने बजाए। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए थाने में रखा।


पुलिस का दावा: आत्महत्या की गई


पुलिस के मुताबिक, 31 मार्च की सुबह लगभग 6 बजे सनी कुमार का शव थाने के शौचालय में लटका मिला। पुलिस का कहना है कि उसने अपने पायजामे के नाड़े का इस्तेमाल कर ग्रिल के हुक में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें कोई बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए और रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई।


परिजनों का आरोप: पुलिस ने की हत्या


सनी के परिवारवालों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सनी को दो दिन तक गैरकानूनी रूप से थाने में रखा गया और इस दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। शव मिलने के बाद जैसे ही यह खबर फैली, गुस्साए ग्रामीणों ने थाने पर धावा बोल दिया और तोड़फोड़ की। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और चार थानों की फोर्स मौके पर तैनात करनी पड़ी।


एसएसपी का बड़ा एक्शन, पुलिसकर्मी निलंबित


मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी हेमराज मीणा ने थाना प्रभारी कमलेश पटेल, एक उप-निरीक्षक और एक सिपाही को निलंबित कर दिया है। साथ ही इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने पर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


विपक्ष ने उठाए सवाल, मुआवजे की मांग


मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व सांसद डॉ. बलराम यादव ने इसे दलित उत्पीड़न का मामला बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी और जमीन देने की मांग की है। विपक्षी दलों ने भी पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है।


इलाके में तनाव, पुलिस का कड़ा पहरा


घटना के बाद से तरवां थाना क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। पुलिस प्रशासन ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन मृतक के परिजन अब भी न्याय की मांग कर रहे हैं।


जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह आत्महत्या थी या पुलिस हिरासत में हत्या का मामला। प्रशासन पर अब निष्पक्ष जांच करने का दबाव बढ़ चुका है।

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