अखिलेश्वर तिवारी
जनपद बलरामपुर जिला मुख्यालय के एमएलके पीजी कॉलेज में संचालित राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में तीसरे दिन स्वच्छता अभियान चलाकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया ।
8 मार्च 2025 को महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के ईकाई एक, दो व तीन द्वारा 6 मार्च 25 से उच्च प्राथमिक विद्यालय गंगाडीह में आयोजित किए जा रहे सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन का कार्यक्रम दो सत्रों मे आयोजित किया गया । साथ ही ईकाई चार का तीसरे दिन का कार्यक्रम प्राथमिक विद्यालय मुसीबत पुरवा बलरामपुर मे आयोजित किया गया । ईकाई एक, दो तथा तीन के तीसरे दिन के प्रथम सत्र का प्रारंभ वैदिक मंगलाचरण तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ । वैदिक मंगलाचरण गिरिजा शुक्ला , सीमा वर्मा, प्रिया शुक्ला के द्वारा किया गया । तत्पश्चात राष्ट्रीय सेवा योजना के ईकाई एक, दो तीन तथा चार के कार्यक्रमाधिकारी डाॅ आलोक शुक्ल, डॉ रमेश शुक्ल, डाॅ अनामिका सिंह तथा डाॅ जितेन्द्र भट्ट के नेतृत्व मे स्वच्छता रैली निकाली गई । स्वच्छता रैली मे स्वयसेवक तथा स्वयं सेविकाओं द्वारा गंगाडीह, मुसीबत पुरवा, सौबत पुरवा व बंजारनडीह गांवों मे रैली निकाल कर साफ सफाई की गई तथा स्वच्छता के महत्व पर ग्रामीणों मे जागरूकता का प्रचार किया गया । कार्यक्रमाधिकारी डाॅ रमेश शुक्ल ने स्वयंसेवक, स्वयं सेविकाओं तथा ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता भारतीय चिंतन के मूल मे है । डाॅ शुक्ल ने स्वच्छ भारत अभियान के विषय मे स्वयंसेवक स्वयं सेविकाओं तथा ग्रामीणों को संक्षेप मे जानकारी दी । उन्होने खुले में शौच के दुष्परिणाम पर अपने विचार संक्षेप मे रखे । डॉ आलोक शुक्ल ने जल प्रदूषण तथा प्लास्टिक के प्रयोग से होने वाले नुकसान के विषय मे संक्षेप मे जानकारी दी । डॉ जितेन्द्र भट्ट ने रासायनिक उर्वरक के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान पर संक्षेप मे अपने विचार रखे । डाॅ अनामिका सिंह ने ग्रामीण महिलाओं तथा सवंयसेवक एवं स्वयं सेविकाओं को सम्बोधित करते हुए कस्तूरबा गांधी के नेतृत्व मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय भारत के ग्रामीण क्षेत्रों मे चलाए गए रचनात्मक कार्यों का उल्लेख किया । प्रथम सत्र मे स्वच्छता का हमारे जीवन मे महत्व विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमे अनेको स्वयंसेवक तथा स्वयं सेविकाओं ने भाग लिया । भाषण प्रतियोगिता में जिन स्वयंसेवक तथा स्वयंसेवीकाओं ने भाग लिया उनमे प्रमुख रूप से विजय कुमार, विनोद कुमार गुप्ता, पीयूष कसौधन, शहनाज, रेखा व अमित यादव शामिल हैं । डॉ रमेश शुक्ल द्वारा स्वयंसेवक तथा स्वयं सेविकाओं को स्वच्छता शपथ दिलाया गया । तीसरे दिन के इस कार्यक्रम के द्वितीय सत्र मे विषय था महिला सशक्तीकरण । इसमे मुख्य अतिथि के रूप मे उच्च न्यायालय लखनऊ की वरिष्ठ अधिवक्ता (क्राइम ) सुनीता कश्यप शामिल थी । विशिष्ट अतिथि के रूप मे महाविद्यालय के भूगोल विभाग की वरिष्ट प्रोफेसर रेखा विश्वकर्मा, महाविद्यालय की सह क्रीडा पदाधिकारी डाॅ साक्षी शर्मा, वरिष्ट अधिवक्ता अशोक मिश्रा उपस्थित रहे । साथ ही इस अवसर पर अन्य अतिथियों मे डाॅ अर्चना पाण्डेय, डॉ श्रद्धा सिंह , वर्षा सिंह, गौरी पुरी, मणिका मिश्रा, डॉ बंदना सिंह सहित अन्य कई प्राध्यापक उपस्थित थे । स्वयंसेवक तथा स्वयं सेविकाओं द्वारा सरस्वती बंदना तथा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया । स्वयंसेवक विजय कुमार तथा पीयूष द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना का लक्ष्य गीत प्रस्तुत किया गया । डाॅ आलोक शुकल , डाॅ अनामिका सिंह डाॅ रमेश शुकला ने मुख्य अतिथि सुनीता कश्यप तथा अन्य अतिथियों का स्वागत परंपरागत ढंग से द्वितीय सत्र मे स्वागत किया । मुख्य अतिथि के रूप मे अपने सम्बोधन मे वरिष्ट अधिवक्ता सुनीता कश्यप ने अपने सम्बोधन मे महिला सशक्तीकरण तथा शिक्षा विषय पर अपने विचार रखे ।उन्होने पोस्को कानून के विषय मे भी सभी को बतलाया । भूगोल विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो रेखा विश्वकर्मा ने स्वयंसेवकों तथा स्वयं सेविकाओं को सम्बोधित करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व की जानकारी संक्षेप मे दी । ईकाई चार के द्वितीय सत्र मे मुख्य अतिथि के रूप मे मनोविज्ञान विभाग से डाॅ कृतिका तिवारी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप मे समाजशास्त्र विभाग से डाॅ अर्चना शुक्ला उपस्थित थी । ईकाई चार के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ जितेन्द्र भट्ट ने मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि का स्वागत परंपरागत ढंग से किया । मुख्य अतिथि के रूप मे अपने सम्बोधन मे कृतिका तिवारी ने ऋग्वेद वैदिक सभ्यता के समय की विदूषी महिलाएं गार्गी ,लोपामुद्रा, अपाला, घोषा के बारे मे संक्षेप मे जानकारी दी । सम्पूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ रमेश कुमार शुक्ल ने किया । कार्यक्रम मे डाॅ स्वदेश भट्ट, डाॅ सुनील शुक्ला, डाॅ श्रीकृष्ण त्रिपाठी, डॉ अभय नाथ ठाकुर, सिद्धार्थ मोहंता शामिल हुए । कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
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